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जसोलधाम

श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल

श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल के बारे में

श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल (जसोलधाम) परिसर में प्रतिदिन की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए अधिकृत निकाय है। यहां रहवास, भोजन प्रसादी सहित भक्तों के सुविधार्थ समस्त सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती है। जसोलधाम जो राजस्थान राज्य के बालोतरा जिले की पचपदरा तहसील में प्राचीन लूणी नदी (राजस्थान की मरू गंगा) के तट पर स्थित जसोल में एक पवित्र धाम है। जसोलधाम एक धर्मनिरपेक्ष स्थान है, यहां सभी धर्मों को एक एवं सर्वोच्च माना जाता है तथा विश्वास और धैर्य की शक्ति में विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है। एक ऐसा पवित्र धार्मिक स्थल जहां प्रार्थना में सिर झुकते है, यहां विश्वास प्रबल है, आशाएं बनती है और धैर्य फल देता है तथा अनंत आनंद और चिरस्थायी संतोष प्रचुर मात्रा मे प्राप्त होता है। ऐसी महिमा श्री राणीसा भटियाणीसा स्वरूप कँवर की है। यहां भक्ति का सच्चा भण्डार है और दया जो सभी भक्तों को समान रूप से आशीर्वाद प्रदान करती है।

श्री राणीसा भटियाणीसा स्वरूप कँवर के असंख्य भक्तों की पवित्र भक्ति ने इस ग्राम को एक प्रमुख धार्मिक तीर्थ स्थल बना दिया है। देश के विभिन्न प्रांतो (राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना इत्यादि प्रांतों) से लाखों की संख्या में श्रदालु यहां निरन्तर आते है। राष्ट्रीय राजमार्ग 112 पर स्थित जसोल 344024 (राजस्थान) के लिए बालोतरा रेल्वे स्टेशन से भी पहुंचा जा सकता है। श्री राणीसा भटियाणीसा स्वरूप कँवर का यह पवित्र दरबार, जिसे प्यार से ” माँ जी सा ” एवं “मां जसोल” के रूप में भी जाना जाता है। जिसे जैसलमेर के पीले पत्थरों में जटिल रूप से उकेरा गया है। चमत्कारी शक्ति राज राजेश्वरी श्री राणीसा भटियाणीसा स्वरूप कँवर में विश्वास ने इस ग्राम को सभी जातियों, पंथों और धर्मों के लिए एक अद्वितीय पवित्र एवं प्रमुख धार्मिक स्थान में बदल दिया है। जसोलधाम की धार्मिक यात्रा के दौरान भक्तों को मन की पूर्ण शांति एवं आंतरिक शक्ति की मजबूत भावना और तृप्ति की महान भावना का अनुभव होता है। जसोलधाम पूरे वर्ष सभी मौसम में दर्शन लाभ के लिए सुविधाजनक स्थल है। श्री राणीसा भटियाणीसा का यह धार्मिक स्थल, जहां उनके असंख्य भक्त आशा से भरे हुए आते है और संतोष प्राप्त कर लौटते है।

संक्षिप्त इतिहास

14 वीं शताब्दी में महेचा राठौड़ो की राजधानी मेवानगर स्थानांतरित हो गई और उस समय रावल श्री मल्लीनाथ जी महेचा राठौड़ो के शासक थे, जिन्होंने अपने सैन्य अभियानों और प्रशासनिक कौशल से भविष्य के राठौड़ साम्राज्य की नींव रखी। उन्होंने श्री राणीसा रूपादे जी की भक्ति भावना से प्रेरित होकर उनके साथ आध्यात्मिक मार्ग को चुना और महान संत बन गए और इनको समकालीन रामदेवजी, पाबूजी, हड़बूजी, जैसल जी उनकी राणी तोरल जी (कच्छ, गुजरात) जैसे लोक देवताओं के समान पूजा जाता है। जिस क्षेत्र को "मालाणी" कहा जाने लगा, उसका नाम महान संत शासक रावल श्री मल्लीनाथ जी एवं माला से लिया गया।

महेचा राठौड़ों के इसी राजवंश में 18 वीं शताब्दी में श्री राणीसा भटियाणीसा स्वरूप कँवर का विवाह रावल श्री कल्याणमल जी के साथ हुआl वह जैसलमेर जिले के जोगीदास का गाँव के ठाकुर श्री जोगीदास जी भाटी की सुपुत्री थीl वह अपनी सुंदरता, सदगुणों, सदचरित्र और बड़प्पन के लिए जानी जाती थी और एक बहुत ही पवित्र महिला थीl अपने विवाह के बाद वे बालोतरा जिले के पचपदरा तहसील में लूणी नदी के तट पर स्थित जसोल ग्राम में रावल कल्याणमल जी के संग बस गई l उन्होंने विवाह के तकरीबन एक या दो वर्ष उपरांत श्री लालसिँह नाम के एक सुन्दर राजकुमार को जन्म दियाl

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न्यासियों की सूची

1. रावल श्री किशन सिंह जी जसोल - अध्यक्ष
2. जस्टिस श्री रघुवेंद्र सिंह जी राठौड़ - ट्रस्टी
3. ठाकुर श्री सिद्धार्थ सिंह जी रोहट - ट्रस्टी
4. कर्नल श्री शम्भू सिंह जी देवड़ा कालंद्री - ट्रस्टी
5. ठाकर श्री गम्भीर सिंह जी जसोल - ट्रस्टी
6. कुंवर श्री गजेंद्र पाल सिंह जी पौषाणा - ट्रस्टी
7. ठाकर श्री गजेंद्रसिंह जी जसोल - सचिव